दिल मे दबी कोई टिस तो है
एक तस्वीर आँखों में छपी तो है
यूँ ही आह नहीं निकल रही
कही कोई कमी सी तो है।
दिल मे दबी कोई टिस तो है....
नींद में कोई खलबली सी तो है
ख़्वाबों में कोई मनचली तो है
यूँ ही नहीं कोई याद आ रहा
कही कोई आग लगी तो है।
दिल मे दबी कोई टिस तो है....
शायरी में किसी का ज़िक्र तो है
कुछ न सही मगर दिल्लगी तो है
इस लॉकडाउन में हर तरफ सन्नाटा है
फिर भी दिल मे कोई खलबली तो है।
दिल मे दबी कोई टिस तो है....
एक तस्वीर आँखों में छपी तो है
यूँ ही आह नहीं निकल रही
कही कोई कमी सी तो है।
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