आज मैंने फिर कलम उठाया है।
अपने जज़्बातों को कलम से उतार पेजों पर संवारा है।।
नयी कहानी, नयी राह पर चलने का इरादा है।
अपनी गलतियों से सीख, अब जीवन को सफल बनाना है।।
नींद देती है, ना जाने कितने ख़ाब भी देती है
वो माँ ही है जो हर सवालों का जवाब देती है
जब भी घिरे हो मुश्किलों से बड़े आराम से निकाल देती है
वो माँ ही है जो हर मुसीबतों का मुँहतोड़ जवाब देती है
भूखे हों बच्चे तो अपनी थाली परोस देती है
वो माँ ही है जो अपने भूख को भी मात देती है।
इस क़दर उन्होंने हमें बदनाम कर दिया...
कि सारे जहाँ में चर्चा हमारा आम कर दिया...
हमने तो देखा था बस उन्हें दोस्ती की नज़र से...
और उन्होंने करके मोहब्बत क़िस्सा हमारा तमाम कर दिया...