वो दिन भी क्या दिन थे, जब माँ लोरियां गाती थी। अपने आंचल की छांव से जब चुपके से उठाती थी। ठाठ हमारे कौन सा कम थे हम दोबारा से सो जाते थे। देख हमारे नखरे फिर वो जोरों से चिल्लाती थी। नहला धुला, कंघी ते...
एक दिन मैंने एक मुट्ठी चमक चंद्रमा से था मांगा, चंद्रमा ने फिर हंसकर दिया था जवाब। यह चमक मेरी अपनी नहीं है, यह चमक मुझे सूर्यदेव से मिली है। जब-जब मैं उनसे दूर हूँ जाती, तब-तब मैं अंधकार में डूबती ही...
जब मैं सोती हूँ, तब मैं ख्याबों को हूँ बुनती। कभी परी तो कभी जादूगर हूँ मैं बनती। अपने समस्याओं का स्वयं मैं निवारण हूँ करती। नहीं-नहीं चुनौती का निर्माण मैं स्वयं हूँ करती। कभी-कभी तो मैं ईश्वर से भ...
काश! हर दिन चुनाव होता। आरोप-प्रत्यारोप का दुकान होता। नेताओं का इम्तिहान होता। चुनावी रैलियों का भरमार होता। झूठे वादे बेशुमार होता। रोजगार का भंडार होता। योजनाओं का अंबार होता। जोड़- तोड़ का मेल होता।...
बड़े खुशनसीब होते है वो लोग जिनकी पहली संतान होती है बेटियों कभी लक्ष्मी तो कभी सरस्वती का रूप भी होती है बेटियों सबके जीवन को खुशहाल बनाती है बेटियों।। पापा की लाड़ली ओ' माँ की दुलारी होती है बेटियों भ...
उत्तर वाहिनी बहती जहाँ गंगा भोले की नगरी में हो जाता मन चंगा वो एक शहर नहीं मेरी जान बनारस है मोक्ष मिलती जिस नगरी में हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट जहाँ पर भोले की भक्ति में सब झूमे मिलता श्री विश्वना...
दिल मे दबी कोई टिस तो है एक तस्वीर आँखों में छपी तो है यूँ ही आह नहीं निकल रही कही कोई कमी सी तो है। दिल मे दबी कोई टिस तो है.... नींद में कोई खलबली सी तो है ख़्वाबों में कोई मनचली तो है यूँ ही नहीं को...