Soulful Poems & Kavita

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Komal Rawat
Komal Rawat
13 Sep 2026
बचपन के दिन और माँ का आँचल
वो दिन भी क्या दिन थे, जब माँ लोरियां गाती थी। अपने आंचल की छांव से जब चुपके से उठाती थी। ठाठ हमारे कौन सा कम थे हम दोबारा से सो जाते थे। देख हमारे नखरे फिर वो जोरों से चिल्लाती थी। नहला धुला, कंघी तेल लगा जब स्कूल तक पहुंचाती थी। तब जाकर ही शायद वो एक निवाला खाती थी। दिन भर करती काम मगर माथे पे सिकन न आती थी। अक्सर अपनी फटी एड़ियां सबसे वो छिपाती थी। है कितने एहसान तेरे, इस जन्म चुका ना पाऊँगी। तेरे कदमों की मिट्टी अपने सर माथे लगाऊँगी।

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Jyoti Kumari
Jyoti Kumari
13 Sep 2026
प्रकृति के पाठ और जीवन के मूल मंत्र
एक दिन मैंने एक मुट्ठी चमक चंद्रमा से था मांगा, चंद्रमा ने फिर हंसकर दिया था जवाब। यह चमक मेरी अपनी नहीं है, यह चमक मुझे सूर्यदेव से मिली है। जब-जब मैं उनसे दूर हूँ जाती, तब-तब मैं अंधकार में डूबती ही जाती हूँ। जब-जब मैं उनके पास हूँ आती, तब-तब नई किरण, नई उम्मीद हूँ पाती हूँ। अगर तुम भी दूसरों के अच्छे गुणों को अपनाओगे, अच्छे चमक का सही अर्थ तुम जल्द समझ जाओगे।। एक दिन मैंने एक मुट्ठी रोशनी सूर्यदेव से था मांगा, सूर्यदेव ने फिर अपनी किरण से दिया था जवाब। यह रोशनी मेरा कोई वरदान नहीं है, बल्कि यह मेरी कड़ी मेहनत का परिणाम है। जब मैं हूँ जलता, तब मैं हूँ निखरता। जब मैं हूँ तपता, तब मैं हूँ फलता। अगर तुम भी कड़ी मेहनत जो करोगे, तुम देखोगे कि तुम हमेशा फल-फूलते ही रहोगे।। एक दिन मैंने एक मुट्ठी चंचलता जल से था मांगा। जल ने फिर बहकर दिया था जवाब। आओ मैं तुमको इसका राज बताऊँ, अपने राज का तुम्हें साझेदार बनाऊँ। जब मैं हर परिस्थिति में बड़ी आसानी से हूँ ढल जाती, तब जा कर तो मैं लचकदार और चंचल हूँ कहलआती। अगर तुम भी यह गुण धारण कर लोगे, फिर देखना हर मुश्किलों को बड़ी जल्दी पार तुम कर लोगे।। एक दिन मैंने एक मुट्ठी छाया पेड़ो से था मांगा पेड़ों ने फिर छाया बिखेर मुझे दिया था जवाब। यह छाया मेरे वर्षों के कर्मों का परिणाम हैं, यह छाया मेरे वर्षों के संघर्षों का पुरस्कार हैं। कई बार तो मैं फेल भी हुआ। परंतु मैंने अपने आत्मबल को न गिरने दिया। अगर तुम भी यह बात गाँठ बांध लो, फिर देखना हर मुश्किलों की गाँठ खोलना और भी हो जाएगा आसान।। एक दिन मैंने एक मुट्ठी दृढ़ता चट्टान से था मांगा, चट्टान ने फिर बड़े हर्ष और उल्लास से दिया था जवाब। यह दृढ़ता मुझे कड़े संकल्प से है मिली, तभी तो यह सफलता आज मुझे है मिली। अभी तक मैंने बहुत चोटें हैं खाईं, तभी तो आज मुश्किलों को सहन करने इतनी क्षमता मुझमें हैं आईं। अगर तुम भी यह दृढ़ संकल्प आज कर लोगोगे, फिर देखना तुम भी जल्द आसमान छू लोगे।।

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Jyoti Kumari
Jyoti Kumari
13 Sep 2026
ख्याबों का तराना
जब मैं सोती हूँ, तब मैं ख्याबों को हूँ बुनती। कभी परी तो कभी जादूगर हूँ मैं बनती। अपने समस्याओं का स्वयं मैं निवारण हूँ करती‌। नहीं-नहीं चुनौती का निर्माण मैं स्वयं हूँ करती। कभी-कभी तो मैं ईश्वर से भी हूँ मिलती। यह देख मैं हर्ष और उल्लास से हूँ भर जाती। जब मैं सोती हूँ, तब मैं हूँ खो जाती। कभी-कभी तो मैं किसी ओर दुनिया में ही गुम हो जाती। कभी मैं परीक्षा में देर से हूँ पहुंचती, तो कभी परीक्षा में आधा ही हूँ लिखती। कभी मैं सपनो में सर्प को हूँ देखती,‌ तो कभी পাহাড় से गिरता है पत्थर। यह देख आंखें सहम सी है जाती। बार-बार मन को करती है विचलित। जब मैं सोती हूँ, तब मैं दस्तानों को हूँ लिखती। कभी अधूरी तो कभी पूरी कहानी का अफसाना हूँ बनती। कभी दुखी तो कभी सुखी का अंबार हूँ मैं बनती। अपने हार और जीत का आधार हूँ मैं बनती। कभी-कभी तो मेरी गलतियां करती हैं परेशान। फिर यही तो मेरी नई सोच और नई उम्मीदों का तराना हैं बुनती।

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Jyoti Kumari
Jyoti Kumari
13 Sep 2026
काश! हर दिन चुनाव होता
काश! हर दिन चुनाव होता। आरोप-प्रत्यारोप का दुकान होता। नेताओं का इम्तिहान होता। चुनावी रैलियों का भरमार होता। झूठे वादे बेशुमार होता। रोजगार का भंडार होता। योजनाओं का अंबार होता। जोड़- तोड़ का मेल होता। सब पैसों का खेल होता। काश! हर दिन चुनाव होता।

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Deepak Seth
Deepak Seth
13 Sep 2026
बेटियाँ
बड़े खुशनसीब होते है वो लोग जिनकी पहली संतान होती है बेटियों कभी लक्ष्मी तो कभी सरस्वती का रूप भी होती है बेटियों सबके जीवन को खुशहाल बनाती है बेटियों।। पापा की लाड़ली ओ' माँ की दुलारी होती है बेटियों भाई की जान ओ' शान होती है बेटियों घर मे छोटी हो तो सबकी दुलारी और अगर बड़ी हो तो सबकी नानी भी होती है बेटियों।। पापा के मार से भाई को बचाती है बेटियों उसके एवज में भाई से पैसे भी ऐंठती है बेटियों काम करने में कभी सबसे आगे तो कभी जंगारचोरी भी करती है बेटियों।। कहते है पराया धन होती है बेटियों फिर भी हर घर की शान होती है बेटियों घर के आंगन में जब खेलती है बेटियों खुशियों से घर को भर देती है बेटियों।। शादी के बाद अपने ही घर को पराया और पति के घर को अपना बताती है बेटियों भाई के लिए पति से भी लड़ती है बेटियों माँ बाप के बुढ़ापे का सहारा भी होती है बेटियों।। बन लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लोहा लेती है बेटियों कभी सीता तो कभी पन्ना धाय के जैसा त्याग भी करती है बेटियों वीरांगना अहिल्याबाई भी जैसी होती है बेटियों अपना सम्मान बचाने कभी पद्मावती जैसा जौहर भी करती है बेटियों।। हर घर का मान-सम्मान, तख्त ओ' ताज होती है बेटियों खुशियों का खजाना तो ऊपरवाले की नायाब रचना है बेटियों बड़े खुशनसीब होते है वो लोग जिनकी पहली संतान होती है बेटियों।।

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Deepak Seth
Deepak Seth
13 Sep 2026
मेरा शहर बनारस
उत्तर वाहिनी बहती जहाँ गंगा भोले की नगरी में हो जाता मन चंगा वो एक शहर नहीं मेरी जान बनारस है मोक्ष मिलती जिस नगरी में हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट जहाँ पर भोले की भक्ति में सब झूमे मिलता श्री विश्वनाथ का धाम जहाँ पर वो एक शहर नहीं मेरी जान बनारस है शास्त्री जी जैसा महान जहाँ पर प्रेमचंद का गोदान जहाँ पर मिलता सबसे बढ़िया पान जहाँ पर वो शहर नहीं मेरी जान बनारस है भोले की धूनी में हर कोई रमा जहाँ पर दबा के मगही पान मुँह में करता महादेव की गुणगान जहाँ पर बजती बिस्मिल्लाह खान की शहनाई जहाँ पर वो शहर नहीं मेरी जान बनारस है। पहलवान की लस्सी और अस्सी की शाम जहाँ पर स्वयं विराजे भैरव बाबा बनकर काशी कोतवाल जहाँ पर हर हर महादेव का नारा गूँजता सुबह ऑ' शाम जहाँ पर वो शहर नहीं मेरी जान बनारस है।

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Deepak Seth
Deepak Seth
13 Sep 2026
दिल की टीस और सन्नाटा
दिल मे दबी कोई टिस तो है एक तस्वीर आँखों में छपी तो है यूँ ही आह नहीं निकल रही कही कोई कमी सी तो है। दिल मे दबी कोई टिस तो है.... नींद में कोई खलबली सी तो है ख़्वाबों में कोई मनचली तो है यूँ ही नहीं कोई याद आ रहा कही कोई आग लगी तो है। दिल मे दबी कोई टिस तो है.... शायरी में किसी का ज़िक्र तो है कुछ न सही मगर दिल्लगी तो है इस लॉकडाउन में हर तरफ सन्नाटा है फिर भी दिल मे कोई खलबली तो है। दिल मे दबी कोई टिस तो है.... एक तस्वीर आँखों में छपी तो है यूँ ही आह नहीं निकल रही कही कोई कमी सी तो है।

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Anil Kumar Singh
Anil Kumar Singh
13 Sep 2026
संपाती के पंख और अवध का दीप
संपआती से पंख जलें जब कंदराओं की शरण मिले तब शायद दूरदृष्टि मिल जाए कदाचित् हमें राम मिल जाएँ तब इस जीवन के अवध में क्रमबद्ध असंख्या दीप जल जाएंदू

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