एक दिन मैंने
एक मुट्ठी चमक चंद्रमा से था मांगा,
चंद्रमा ने फिर हंसकर दिया था जवाब।
यह चमक मेरी अपनी नहीं है,
यह चमक मुझे सूर्यदेव से मिली है।
जब-जब मैं उनसे दूर हूँ जाती,
तब-तब मैं अंधकार में डूबती ही जाती हूँ।
जब-जब मैं उनके पास हूँ आती,
तब-तब नई किरण, नई उम्मीद हूँ पाती हूँ।
अगर तुम भी दूसरों के अच्छे गुणों को अपनाओगे,
अच्छे चमक का सही अर्थ तुम जल्द समझ जाओगे।।
एक दिन मैंने
एक मुट्ठी रोशनी सूर्यदेव से था मांगा,
सूर्यदेव ने फिर अपनी किरण से दिया था जवाब।
यह रोशनी मेरा कोई वरदान नहीं है,
बल्कि यह मेरी कड़ी मेहनत का परिणाम है।
जब मैं हूँ जलता, तब मैं हूँ निखरता।
जब मैं हूँ तपता, तब मैं हूँ फलता।
अगर तुम भी कड़ी मेहनत जो करोगे,
तुम देखोगे कि तुम हमेशा फल-फूलते ही रहोगे।।
एक दिन मैंने
एक मुट्ठी चंचलता जल से था मांगा।
जल ने फिर बहकर दिया था जवाब।
आओ मैं तुमको इसका राज बताऊँ,
अपने राज का तुम्हें साझेदार बनाऊँ।
जब मैं हर परिस्थिति में बड़ी आसानी से हूँ ढल जाती,
तब जा कर तो मैं लचकदार और चंचल हूँ कहलआती।
अगर तुम भी यह गुण धारण कर लोगे,
फिर देखना हर मुश्किलों को बड़ी जल्दी पार तुम कर लोगे।।
एक दिन मैंने
एक मुट्ठी छाया पेड़ो से था मांगा
पेड़ों ने फिर छाया बिखेर मुझे दिया था जवाब।
यह छाया मेरे वर्षों के कर्मों का परिणाम हैं,
यह छाया मेरे वर्षों के संघर्षों का पुरस्कार हैं।
कई बार तो मैं फेल भी हुआ।
परंतु मैंने अपने आत्मबल को न गिरने दिया।
अगर तुम भी यह बात गाँठ बांध लो,
फिर देखना हर मुश्किलों की गाँठ खोलना और भी हो जाएगा आसान।।
एक दिन मैंने
एक मुट्ठी दृढ़ता चट्टान से था मांगा,
चट्टान ने फिर बड़े हर्ष और उल्लास से दिया था जवाब।
यह दृढ़ता मुझे कड़े संकल्प से है मिली,
तभी तो यह सफलता आज मुझे है मिली।
अभी तक मैंने बहुत चोटें हैं खाईं,
तभी तो आज मुश्किलों को सहन करने इतनी क्षमता मुझमें हैं आईं।
अगर तुम भी यह दृढ़ संकल्प आज कर लोगोगे,
फिर देखना तुम भी जल्द आसमान छू लोगे।।