मेरा शहर बनारस

Written by: Deepak Seth | 13 Sep 2026

उत्तर वाहिनी बहती जहाँ गंगा भोले की नगरी में हो जाता मन चंगा वो एक शहर नहीं मेरी जान बनारस है मोक्ष मिलती जिस नगरी में हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट जहाँ पर भोले की भक्ति में सब झूमे मिलता श्री विश्वनाथ का धाम जहाँ पर वो एक शहर नहीं मेरी जान बनारस है शास्त्री जी जैसा महान जहाँ पर प्रेमचंद का गोदान जहाँ पर मिलता सबसे बढ़िया पान जहाँ पर वो शहर नहीं मेरी जान बनारस है भोले की धूनी में हर कोई रमा जहाँ पर दबा के मगही पान मुँह में करता महादेव की गुणगान जहाँ पर बजती बिस्मिल्लाह खान की शहनाई जहाँ पर वो शहर नहीं मेरी जान बनारस है। पहलवान की लस्सी और अस्सी की शाम जहाँ पर स्वयं विराजे भैरव बाबा बनकर काशी कोतवाल जहाँ पर हर हर महादेव का नारा गूँजता सुबह ऑ' शाम जहाँ पर वो शहर नहीं मेरी जान बनारस है।

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