HOME
SHER
POEM
GAZAL
MEMBERS & WRITERS
GO
ENG
English
Hindi
Urdu
Login
SignUp
Home
|
Members
|
Vivek Dubey
Vivek Dubey
Writer
Delhi, India
8
Posts
9
Views
All Posts
Shayari
Poem
Story
Ghazal
All Content
इश्क़, हुस्न और दीवार
दिलों में खींचने को है एक दीवार देखो। तल्ख़ निगाहों से होता है व्यापार देखो। रह न पाए कोई फ़र्क़ ज़र्रे ज़र्रे का कहीं, इश्क़ हुआ है हुस्न का सितमगर देखो।
Vivek Dubey
5 Views
2 Likes
0 Comments
Read More
राधा-कृष्ण प्रेम और समर्पण
मैं राधिका मन प्यासी बन कृष्ण सखा सी दासी। रच जाऊँ बस जाऊँ नैनन में भेद रहे न इस मन में उस मन में।
Vivek Dubey
4 Views
1 Likes
0 Comments
Read More
कर्म और सृजन का मार्ग
मंजिलें न तलाश तू, चला चल रास्ते पे तू। रास्ता वहीं तमाम होगा, जहाँ मँज़िल का मुक़ाम होगा। चिंता नहीं चिंतन कर तू, मातम नहीं मंथन कर तू। न उलझ दुनियाँ के फेर में, अपना ही सृजन कर तू।
Vivek Dubey
0 Views
0 Likes
0 Comments
Read More
विश्वास और आस्था की शक्ति
तुम पूजो जिस पत्थर को पर विश्वास भरो। हो जाएगा जड़ भी चेतन छूकर आभास करो। मुड़ जाती हैं धाराएँ भी सरिता की, इठलाती धाराओं को बाहुपाश भरो।
Vivek Dubey
0 Views
0 Likes
0 Comments
Read More
सच्चा लेखक और उसका सृजन
लिखता है वो बस लिखता है। अनुभव जीवन के लिखता है। नहीं कभी किताबों में छपता है, ना ही मंचों पर वो बिकता है।
Vivek Dubey
0 Views
0 Likes
0 Comments
Read More
ख्वाब और आफ़ताब
हम ख़्वाब देखते रह गए। अहसास सहजते रह गए। आए वो हिजाब में नज़र, हम आफ़ताब देखते रह गए।
Vivek Dubey
0 Views
0 Likes
0 Comments
Read More
सफर और साज
चलता रहा कल तक, आज की खातिर। बजता रहा साज भी, आवाज़ की खातिर। उतरती रहीं कुछ नज़्में, ख़्वाब ज़मीन पर, देती रहीं हसरतें हवा, नाज़ की खातिर।
Vivek Dubey
0 Views
0 Likes
0 Comments
Read More
माँ का आंचल और ममता
लिए हैयत का अहसास सीड़ा, ओ माँ तू बड़ी ख़ास ख़ास सी। मिलता है सुकूँ तेरे आँचल में, तेरी हँसी में सारी कायनात सी।
Vivek Dubey
0 Views
0 Likes
0 Comments
Read More
U
User