जब भी देखा करते थे तेरे घर की ओर, तेरा छत पर आना तो बस एक बहाना था!
हमारे इशारों पर तेरा घबराना आशिकाना था, यू गुस्से से तेरा देखना क्योंकि हमे सताना था!
हम कल भी वही थे जो आज हैं हमे तो बस मोहब्बत को आजमाना था!
चाहे वो गुजरा हुआ कल तो या आज.. बस तेरी गली से गुजरना तो एक बहाना था..!
very nice sagar ji