छत पर आना और बहाना

Written by: Sagar Kumar | 12 Sep 2026

जब भी देखा करते थे तेरे घर की ओर, तेरा छत पर आना तो बस एक बहाना था!

हमारे इशारों पर तेरा घबराना आशिकाना था, यू गुस्से से तेरा देखना क्योंकि हमे सताना था!

हम कल भी वही थे जो आज हैं हमे तो बस मोहब्बत को आजमाना था!

चाहे वो गुजरा हुआ कल तो या आज.. बस तेरी गली से गुजरना तो एक बहाना था..!


Comments (1)

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12 Sep 2026, 10:30 PM

very nice sagar ji

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