कर्म और सृजन का मार्ग

Written by: Vivek Dubey | 13 Sep 2026

मंजिलें न तलाश तू, चला चल रास्ते पे तू। रास्ता वहीं तमाम होगा, जहाँ मँज़िल का मुक़ाम होगा। चिंता नहीं चिंतन कर तू, मातम नहीं मंथन कर तू। न उलझ दुनियाँ के फेर में, अपना ही सृजन कर तू।

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