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Jyoti Kumari
Jyoti Kumari
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Delhi, India
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Shayari
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Ghazal
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प्रकृति के पाठ और जीवन के मूल मंत्र
एक दिन मैंने एक मुट्ठी चमक चंद्रमा से था मांगा, चंद्रमा ने फिर हंसकर दिया था जवाब। यह चमक मेरी अपनी नहीं है, यह चमक मुझे सूर्यदेव से मिली है। जब-जब मैं उनसे दूर हूँ जाती, तब-तब मैं अंधकार में डूबती ही जाती हूँ। जब-जब मैं उनके पास हूँ आती, तब-तब नई किरण, नई उम्मीद हूँ पाती हूँ। अगर...
Jyoti Kumari
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ख्याबों का तराना
जब मैं सोती हूँ, तब मैं ख्याबों को हूँ बुनती। कभी परी तो कभी जादूगर हूँ मैं बनती। अपने समस्याओं का स्वयं मैं निवारण हूँ करती। नहीं-नहीं चुनौती का निर्माण मैं स्वयं हूँ करती। कभी-कभी तो मैं ईश्वर से भी हूँ मिलती। यह देख मैं हर्ष और उल्लास से हूँ भर जाती। जब मैं सोती हूँ,...
Jyoti Kumari
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काश! हर दिन चुनाव होता
काश! हर दिन चुनाव होता। आरोप-प्रत्यारोप का दुकान होता। नेताओं का इम्तिहान होता। चुनावी रैलियों का भरमार होता। झूठे वादे बेशुमार होता। रोजगार का भंडार होता। योजनाओं का अंबार होता। जोड़- तोड़ का मेल होता। सब पैसों का खेल होता। काश! हर दिन चुनाव होता।
Jyoti Kumari
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कलम और नए इरादे
आज मैंने फिर कलम उठाया है। अपने जज़्बातों को कलम से उतार पेजों पर संवारा है।। नयी कहानी, नयी राह पर चलने का इरादा है। अपनी गलतियों से सीख, अब जीवन को सफल बनाना है।।
Jyoti Kumari
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About Jyoti Kumari
मेरा परिचय मेरा परिवार है। मेरा व्यवहार है मेरे दोस्त। मेरा भविष्य मेरी पढ़ाई है। और मेरा धन है मेरा कर्म।
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