मंजिलें न तलाश तू, चला चल रास्ते पे तू। रास्ता वहीं तमाम होगा, जहाँ मँज़िल का मुक़ाम होगा। चिंता नहीं चिंतन कर तू, मातम नहीं मंथन कर तू। न उलझ दुनियाँ के फेर में, अपना ही सृजन कर तू।
जब भी देखा करते थे तेरे घर की ओर, तेरा छत पर आना तो बस एक बहाना था!हमारे इशारों पर तेरा घबराना आशिकाना था, यू गुस्से से तेरा देखना क्योंकि हमे सताना था!हम कल भी वही थे जो आज हैं हमे तो बस मोहब्बत को आ...
आज़ादी की मशाल जो शहीद लहू से अपने जला गए।याद आते ही उनकी कुर्बानियाँ आँखों में आँसू आ गए।करते हैं वंदन और नमन भारत के उन वीर सपूतों को,जो शीश अपना मातृभूमि के चरणों में भेंट चढ़ा गए।।
अक्सर ही ऐसा होता है जब नाम तेरा जुबां पर आता है तो, धड़कनें मेरी थम जाती हैं...कैसी कशिश है, तुझमें सनम जो देख कर ही तुझे मेरी हर तकलीफ़ कम हो जाती है।।