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मैंने मुस्कराहट का लिबास ओढ़ा है जब से,
आँखों ने आँसू बहाना तो छोड़ दिया।
मगर दिल नादान इतना कि रोता है अब भी,
और बेपरवाहों से रास्ता अपना मोड़ लिया।
किस्से जब जवाब तलब करते,
सवाल भी मैं जवाब भी मैं ॥
अक्सर ही ऐसा होता है जब नाम तेरा जुबां पर आता है तो, धड़कनें मेरी थम जाती हैं....
कैसी कशिश है, तुझमें सनम जो देख कर ही तुझे मेरी हर तकलीफ़ कम हो जाती है।।
अब एक-एक लफ़्ज़ समझाने लगे गर तुम्हें, तो सदियाँ बीत जाएँगी!
आँखें पढ़ लो एक बार, बात सारी आईने की तरह साफ नज़र आएगी!!
गम मेरे हैं तो आँसू भी मेरे ही बहने दो,
थोड़ी देर तन्हाई के आगोश में रहने दो।
दिल-ओ-दिमाग में जंग छिड़ी है अभी,
वक्त देते हैं, एक दूसरे को समझने दो।
हवा का प्यारा सा झोंका जब छू जाए तेरे गालों को,
समझ जाना तब आधार मिल गया है मेरे अधरों को...
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